नई दिल्ली, 17 सितंबर 2026: अमेरिका में रूस पर नए प्रतिबंधों से जुड़ा बिल भारत के लिए भी चिंता का विषय बन गया है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने रूस और ईरान पर प्रतिबंधों से जुड़े नए बिल को मंजूरी दे दी है। अब यह बिल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा।
इस बिल में अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रावधान है। भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है, इसलिए इस प्रावधान का भारत-अमेरिका व्यापार और देश की ऊर्जा सुरक्षा पर संभावित असर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत पर तुरंत 100% टैरिफ लागू नहीं होगा
बिल में 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की अधिकतम शक्ति का प्रावधान है। इसका मतलब यह नहीं है कि कानून लागू होते ही भारत से होने वाले सभी आयात पर 100 प्रतिशत शुल्क लगा दिया जाएगा।
बिल के कानून बनने के बाद अमेरिकी प्रशासन यह तय करेगा कि किन देशों को इसके दायरे में रखा जाएगा और उनके खिलाफ कितनी टैरिफ दर लागू की जाएगी। इसलिए भारत पर वास्तविक टैरिफ और उसकी शर्तें आगे होने वाले अमेरिकी फैसलों पर निर्भर करेंगी।
रूस से भारत की बढ़ी कच्चे तेल की खरीद
रूस पिछले कुछ वर्षों में भारत के लिए कच्चे तेल का प्रमुख आपूर्तिकर्ता बन गया है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भारतीय रिफाइनरों ने रूसी कच्चे तेल की खरीद में काफी बढ़ोतरी की।
जुलाई 2026 में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी करीब 51 प्रतिशत बताई गई। रूस से मिलने वाला तेल भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण स्रोत बन चुका है।
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर असर
अमेरिकी प्रतिबंध बिल ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार से जुड़े मुद्दों पर बातचीत भी जारी है। ऐसे में रूस से भारत की तेल खरीद और संभावित अतिरिक्त अमेरिकी टैरिफ दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों में महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकते हैं।
भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा एक प्रमुख प्राथमिकता है। इसलिए आने वाले दिनों में अमेरिकी प्रशासन के फैसलों और भारत की ओर से संभावित प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।
अब भारत के सामने क्या स्थिति है?
अब आगे की स्थिति मुख्य रूप से अमेरिकी प्रशासन के फैसलों पर निर्भर करेगी। आने वाले समय में यह देखा जाएगा कि:
- क्या बिल राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद कानून बनता है।
- भारत को इस प्रावधान के तहत किस तरह रखा जाता है।
- भारत पर अतिरिक्त टैरिफ की वास्तविक दर कितनी तय होती है।
- किन उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लागू किया जाता है।
- भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर इसका क्या असर पड़ता है।
- रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर भारत की रणनीति में कोई बदलाव होता है या नहीं।
फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लागू हो चुका है। मौजूदा स्थिति में बिल अमेरिकी राष्ट्रपति को 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रावधान करता है। वास्तविक दर और कार्रवाई आगे अमेरिकी प्रशासन के फैसले से स्पष्ट होगी।